
रंगभूमि
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बनारस के पास पाँडेपुर गाँव का अंधा भिखारी सूरदास अपनी पुश्तैनी ज़मीन पर गाँव के जानवर चरने देता है। जब ईसाई व्यापारी जॉन सेवक वहाँ सिगरेट का कारखाना लगाना चाहता है, तो सूरदास अकेला राजा, अफ़सरों और पूँजी के सामने अड़ जाता है।
- 장르
- 순수문학, 사회 문제
- 배경
- Pandeypur, 바라나시, 우타르프라데시 주, 인도; 바라나시, 우타르프라데시 주, 인도
- 대상 독자
- 성인
- 출간일
- 1925


