
प्रेमसागर
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मथुरा की कारागार में जन्म से लेकर गोकुल-वृंदावन की बाल-लीलाओं, कंस-वध और द्वारका तक कृष्ण की पूरी कथा, जैसे शुकदेव राजा परीक्षित को सुनाते हैं। कलकत्ते के फ़ोर्ट विलियम कॉलेज में लिखी यह किताब खड़ी बोली हिंदी गद्य की पहली बड़ी रचनाओं में गिनी जाती है।
