
प्रेमसागर
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मथुरा की कारागार में जन्म से लेकर गोकुल-वृंदावन की बाल-लीलाओं, कंस-वध और द्वारका तक कृष्ण की पूरी कथा, जैसे शुकदेव राजा परीक्षित को सुनाते हैं। कलकत्ते के फ़ोर्ट विलियम कॉलेज में लिखी यह किताब खड़ी बोली हिंदी गद्य की पहली बड़ी रचनाओं में गिनी जाती है।
- विधाएँ
- विश्व धर्म, पौराणिक फ़ैंटेसी
- पृष्ठभूमि
- मथुरा, उत्तर प्रदेश, भारत; Vrindāvan, उत्तर प्रदेश, भारत; Gokul, उत्तर प्रदेश, भारत; Dwārka, गुजरात, भारत
- पाठक वर्ग
- वयस्क
- प्रकाशन
- 1810
