
निर्मला
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पिता की अचानक मौत के बाद दहेज न दे पाने से पंद्रह साल की निर्मला का रिश्ता टूट जाता है, और माँ उसे तीन जवान बेटों वाले अधेड़ वकील तोताराम से ब्याह देती है। शक, अकेलापन और एक घर का धीरे-धीरे बिखरना: दहेज और बेमेल विवाह पर प्रेमचंद का सबसे तीखा उपन्यास।
- ז׳אנרים
- ספרות יפה, סאגה משפחתית
- מתרחש ב
- אוטר פראדש, הודו
- קהל יעד
- מבוגרים
- יצא לאור
- 1927





